मंगलवार, 23 मई 2023

प्राणायाम से रोग मुक्ति

सर्वप्रथम हम प्राणायाम के बारे में समझने का प्रयास करते हैं।

प्राणायाम का योग में बहुत महत्व है। आदि शंकराचार्य श्वेताश्वतर उपनिषद पर अपने भाष्य में कहते हैं- "प्राणायाम के द्वारा जिस मन का मल धुल गया है वही मनुष्य ब्रह्म में स्थिर होता है। 

विवेकानंद इस विषय में अपना मत व्यक्त करते हैं, प्राणायाम के सिद्ध होने पर हमारे लिए अनंत शक्ति का द्वार खुल जाता है। संसार में ऐसी कौन-सी शक्ति है, जो उसके अधिकार में नहीं आए? जगह से हिलने लगते हैं, क्षुद्रतम परमाणु से वृहत्तम सूर्य तक सभी उसके वशीभूत हो जाते हैं, क्योंकि उसने प्राण को जीत लिया है। प्रकृति को वशीभूत करने की शक्ति प्राप्त करना ही प्राणायाम की साधना का लक्ष्य है।

जब प्राणायाम से इतना कुछ हो सकता है तो प्रयोग से मुक्ति बहुत छोटी बात है।

प्राणायाम योग के आठ अंगों में से एक है। अष्टांग योग में आठ प्रक्रियाएं होती हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। 

प्राणायाम = प्राण + आयाम । इसका अर्थ है - प्राण या श्वसन को क्रिएट करना मौखिक या फिर जीवनी शक्ति को क्रिएट करना। प्राणायाम का अर्थ है श्वास को नियंत्रित करना | परंतु स्वास को कम करना नहीं होता है प्राण या श्वास के आयाम या विस्तार ही प्राणायाम हैं |

हठयोगप्रदीपिका के अनुसार प्राणायाम के विभिन्न भेद हैं -

सूर्यभेदन, उज्जायी, शीतली, शीतली, भस्त्रिका, भ्रमरी, मूर्च्छा और प्लाविनी ये आठ प्रकार के प्राणायाम होते हैं।

यह प्राण-शक्ति का प्रवाह कर व्यक्ति को जीवन शक्ति प्रदान करता है।

हठयोगप्रदीपिका के अनुसार-

चले वाते चलं चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत्

योगी स्थाणुत्वमाप्नोति ततो वायुं निरोधयेत्॥

अर्थात प्राणों के चलायमान होने पर चित्त भी चलायमान हो जाता है और प्राणों के निश्चल होने पर मन भी स्वयं: निश्चल हो जाता है और योगी स्थाणु हो जाता है। इसलिए योगी को स्वांसों का नियंत्रण करना चाहिए।

यह भी कहा है-

यावद्वायुः स्थितो देहे तावज्जीवनमुच्यते।

मरणं तस्य निष्क्रान्तिः ततो वायुं निरोधयेत् ॥

जब तक शरीर में वायु है तब तक जीवन है। वायु का निकलना ही मरण है। इसलिए वायु का निरोध करना चाहिए।


सावधानियाँ

पहली तीन बातों की आवश्यकता है, विश्वास,भावना, भिन्न।

प्राणायाम करने से पहले हमारा शरीर अंदर और बाहर से शुद्ध होना चाहिए।

सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन किसी भी आसन में बैठें, मगर जिसमें आप अधिक देर तक बैठ सकते हैं, उसी आसन में बैठें। रीढ़ को सीधा रखें और शरीर को तनाव मुक्त रखें।

प्राणायाम करते समय हमारे हाथों को ज्ञान या किसी अन्य मुद्रा में जाना जाएगा। या फिर गोद में रखें, बायां हाथ पर दायां हाथ रखें।

प्राणायाम करते समय हमारे शरीर में कहीं भी किसी भी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिए, यदि तनाव में प्राणायाम करेंगे तो उसका लाभ नहीं मिलेगा।

प्राणायाम करते समय अपनी शक्ति का ना करें। यानी खुद के साथ ज्यादा जबरदस्ती न करें।

हर सांस का होना बिल्कुल आराम से होना चाहिए।

जिन लोगो को उच्च रक्त-चाप की शिकायत है, उन्हें अपना रक्त-चाप सामान्य होने के बाद धीमी गति से प्राणायाम करना चाहिए।

यदि आक्षेप हुआ हो तो, छह महीने बाद ही प्राणायाम का धीरे-धीरे अभ्यास करें।

हर सांस के आने के साथ ही मन ही मन में ओम का या सोऽहं का जाप करें। श्वास लेते हुए "स" और प्रदर्शन करते हुए "हं" का जप कर सकते हैं। हालांकि नहीं तो भी कर सकते हैं।

ओम् का जाप का उपचार करने से हमारे पूरे शरीर मे (सिर से ले कर पैर के अंगूठे तक) एक कंपन होता है जो हमारे अंदर की नकारात्मक एनर्जी को बाहर निकल के मन और आत्मा को शुद्ध करता है।

अब तक हम प्राणायाम के बारे में समझा, अगले लेखों में प्राणायाम करने की विधियों पर चर्चा करेंगे।

तब तक के लिए धन्यवाद।😊🙏 

शनिवार, 20 मई 2023

योग और स्वास्थ्य

योग एक प्राचीन भारतीय तकनीक है जिसे मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए उपयोग किया जाता है। योग का शाब्दिक अर्थ है "जुड़ाव" या "मिलाना"। योग शरीर, मन और आत्मा को एक साथ मिलाकर संतुलित और सुखी जीवन को प्राप्त करने की प्रक्रिया है।

योग का मूल उद्देश्य व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक रखना है। इसके माध्यम से अपने मन को शांत किया जा सकता हैं, मनोवृत्तियों पर नियंत्रण कर सकते हैं और ध्यान में स्थिरता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आसन, प्राणायाम और ध्यान जैसी तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं।

योग व्यक्ति को शारीरिक लाभ भी प्रदान करता है। योगासन और प्राणायाम द्वारा शरीर के अंगों की लचीलापन और संतुलितता बढ़ती है, शरीर की क्रियाओं को सुधारता है और तनाव को कम करता है। इसके फलस्वरूप स्वस्थ, मजबूत और स्थिर शरीर विकसित कर सकते हैं।

योग के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के आसन होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्त्व होता है। योगासन शारीरिक स्थिरता, स्पंदनशीलता और समता को बढ़ाते हैं और शरीर के विभिन्न अंगों को राहत प्रदान करते हैं। ये आसन शरीर की लचीलापन बढ़ाते हैं और मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाते हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दिल की बीमारी और अन्य शारीरिक समस्याओं के लिए भी योगासन लाभदायक होते हैं।

प्राणायाम योग का एक और महत्वपूर्ण घटक है जिसमें श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है। प्राणायाम के द्वारा भी अनेक आधि-व्याधियों से मुक्त हो सकते है। 

प्राणायाम के द्वारा ध्यान सहजता से लगता है। ध्यान के माध्यम से मन को स्थिर किया जाता है और आत्मा के आंतरिक प्रकाश को जागृत किया जाता है। यह मन की चंचलता को शांत करने, मन की एकाग्रता को विकसित करने, और आध्यात्मिक अनुभव को प्राप्त करने में मदद करता है। ध्यान करने से मन की चिंताओं, तनाव के कारणों और दुख के स्रोतों का समाधान होता है और आत्मा की ऊर्जा, शांति और प्रकाश का अनुभव होता है।

योग अभ्यास न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि इसका प्रभाव आत्मिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी महसूस होता है।

उत्तम स्वास्थ्य के लिए योगासनों का सहारा लेकर हम बिल्कुल मुफ्त में रोगों से मुक्ति और मन और तन को स्वस्थ रखा जा सकता है।

शनिवार, 13 मई 2023

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य मानव जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। एक स्वस्थ शरीर में खुशहाली की भावना होती है और सफलता के लिए एक अत्यंत आवश्यक माना जाता है। वह लोग जो स्वस्थ रहते हैं, वे सक्रिय रहते हैं और अपने जीवन में अधिक उत्साह और खुशी महसूस करते हैं।

एक स्वस्थ शरीर बनाने के लिए स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद आवश्यक होते हैं। स्वस्थ खान-पान करने से हम अपने शरीर को सभी आवश्यक पोषण उपलब्ध कराते हैं जो हमें अधिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। नियमित व्यायाम करने से हम अपने शरीर को मजबूत बनाते हैं और अपने मस्तिष्क को भी ताजगी देते हैं। अच्छी नींद लेने से हमारे शरीर को ठीक से आराम मिलता है और हम अपने दिन को ताजा मन से शुरू कर सकते हैं।

स्वस्थ रहने के लिए रोगों से बचना भी बहुत आवश्यक है। स्वस्थ रहने के लिए नियमित चेकअप भी जरूरी होता है। इससे हम अपनी बीमारियों को पहले ही पहचान सकते हैं और उन्हें ठीक करने के लिए उचित उपचार ले सकते हैं।

स्वस्थ रहने के लिए ध्यान भी बहुत आवश्यक है। इसके साथ ही स्वस्थ रहने के लिए अपनी मानसिक स्थिति का ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक है। मानसिक स्थिति को संतुलित करने के लिए ध्यान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ध्यान एक तरह की एकाग्रता है जिससे हम अपने मस्तिष्क को एकजुट करते हैं। यह हमारे मन को शांत करता है, और हमारी सोच को सकारात्मक करता है, और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। ध्यान भी स्वस्थ जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

स्ट्रेस और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती हैं। इसलिए अपनी मानसिक स्थिति को संतुलित रखने के लिए मेडिटेशन, योग और अन्य तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।
हमारी दिनचर्या में तनाव कम करने के लिए ध्यान करना भी बहुत जरूरी है। ध्यान धारणा हमें मानसिक शांति प्रदान करती है जो हमें तनाव से मुक्त करती है। ध्यान लगाने से हमारा शरीर अनेक आधि-व्याधियों से मुक्त रहता है जो ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

खाने का भी बहुत अहम रोल हमारे स्वास्थ्य में होता है। हमें स्वस्थ खाने की आदत बनानी चाहिए जो हमारे शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व और विटामिन उपलब्ध करवाती है। इसके लिए हमें सभी पोषण सम्बंधित तत्वों जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, विटामिन और मिनरल्स को सही मात्रा में लेना चाहिए। हमें सब्जियों, फलों, अनाज और प्रोटीन स्रोतों जैसे मछली, अंडे, दूध, दही आदि का उपयोग करना चाहिए।

स्वस्थ रहने के लिए शारीरिक गतिविधियों का भी महत्व होता है। हमारे शरीर को नियमित व्यायाम की आवश्यकता होती है। व्यायाम से हमारे शरीर को ताकत मिलती है, मोटापा कम होता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, मानसिक स्थिति बेहतर होती है और स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है।
समय पर नींद लेना भी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। एक अच्छी नींद हमें शारीरिक और मानसिक स्थिति दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होती है।

और अंत में, स्वस्थ रहने के लिए हमें खुश रहना भी बहुत जरूरी है। हमें खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए और अपने सुखद अनुभवों का आनंद लेना चाहिए। योग और मेडिटेशन जैसी एकांत गतिविधियों से भी हम खुश रह सकते हैं और मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं।

संक्षेप में, स्वस्थ जीवन जीने के लिए नियमित व्यायाम, सही आहार, अच्छी नींद और स्ट्रेस कम करने के लिए ध्यान लगाने की आदत बनाना जरूरी होता है।
मित्रों, आगे के लेखों में और सविस्तार वर्णन करूंगा कि कैसे हम अपने जीवन को स्वस्थ, मजबूत, प्रसन्न, दीर्घायु, सुंदर बना सकते हैं।

इस लेख को अपना समय देने के लिए धन्यवाद।